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About Me

आली सिर्फ एक गांव नहीं, मेरी पहचान है।
मैं उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में पट्टी पेडुलस्यूं के एक छोटे से गांव आली से हूं। यह गांव घने चीड़ के पेड़ों, स्वच्छ हवा और हिमालयी सुंदरता से भरपूर है। कभी यहां के बाग-बगीचों में सेब, आड़ू, अखरोट, नाशपाती और अनेक फल लहलहाते थे। गांव के चारों ओर प्रकृति की गोद में बसी हरियाली, कल-कल करती धाराएं और सादगी भरा जीवन इसकी सबसे बड़ी पहचान रही है। लेकिन समय के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण गांव से भारी पलायन हुआ। आज गांव में कुछ ही बुजुर्ग लोग रह गए हैं जो अब भी इस धरती की खुशबू और परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। मैं भले ही गांव से बाहर पढ़ाई और काम के लिए निकला हूं, लेकिन मेरी जड़ें यहीं से जुड़ी हैं। मेरा सपना है कि गांव के लोग फिर से अपने खेत-खलिहानों को संवारें, बाग-बगीचे फिर से लहलहाएं और हमारे बुजुर्गों की मुस्कान लौट आए। मैं चाहता हूं कि गांव की यह प्राकृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों को भी उसी रूप में मिले जिस रूप में हमने देखी है।
मेरा जन्म ऋषिकेश (उत्तराखंड) में हुआ और वर्तमान में मैं रोज़गार के लिए फ़रीदाबाद में Whrilpool कम्पनी में कार्यरत होने के कारण हरियाणा में रह रहा हूं। मेरा पैतृक गांव पौड़ी गढ़वाल जिले की पट्टी पेडुलस्यूं का आली गांव है, जहां से मेरी जड़ें जुड़ी हैं।
उत्तराखंड से गहरे लगाव के कारण मैं समाज एवं पर्यावरण से जुड़े होने के कारण सामाजिक संस्था उत्तरांचल मैत्री संघ (रजि.) सेक्टर 55 फरीदाबाद की गतिविधियों के साथ-साथ हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूं।
इसी उद्देश्य से मैं “Alternative Development of Himalayan Region (ADHR)” नामक गैर-लाभकारी संस्था से जुड़ा हूं, जो गांवों में पलायन रोकने, पारंपरिक कृषि को बढ़ावा देने, युवाओं को रोजगार से जोड़ने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर काम कर रही है।
मेरा सपना है कि हिमालयी गांव फिर से जीवन से भरपूर हों और आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति और प्रकृति पर गर्व कर सकें।

